Main Door in Vastu : जाने वास्तु में मुख्य द्वार




 Main Door in Vastu में हम आज वास्तुशास्त्र द्वारा मुख्य द्वार बनाने के लिए दिए नियमो का वर्णन करेंगे!
 
इसके बारे में जो सबसे पहली बात दिमाग में आती हैं  वो हैं , मुख्य द्वार व मुख्य द्वार की स्तिथी (Placement of Main Entrance) !

जिसके अनुसार यह हम निश्चित कर सके की कोई भी घर वास्तु अनुसार है की नहीं ?

जैसा की आप जानते है की मुख्य द्वार किसी भी घर के वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण होता है!

आधुनिक युग में जहाँ इतनी प्रतीस्पर्धा हैं वहां कोई भी ऐसी कला या विज्ञान जिसकी सहायता से हम अपने जीवन में सुख - समृद्वि प्राप्त कर सके, उसका उपयोग करना अति अवश्य हैं !

वास्तुशास्त्र प्राचीन कला है जिसने आज विज्ञानं का रूप ले लिया है जिसके नियमो को अपनाकर हम अपने जीवन में आने वाली बाधाओं को वास्तु की सहायता से दूर कर सकते हैं !

वास्तुशास्त्र भारत में प्राचीन काल से उपयोग में लायी जाने वाली कला हैं , जिसका उपयोग प्राचीन काल से भवन-निर्माण और कई इमारतों के सम्बन्ध  में भी किया गया था !

आज वास्तुशास्त्र में बताए नियमो का हम यहां वर्णन करेंगे !

किसी भी ईमारत का निर्माण करने से पूर्व जो सबसे महत्वपूर्ण होता हैं वे है मुख्य द्वार (Main Door Vastu Importance) !

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Main Door Direction Planning :

घर निर्माण व घर लेने के सम्बन्ध में जो  सबसे महत्वपूर्ण होता है वे है मुख्य द्वार का दिशा निर्धारण ( Main Door Vastu)!

1. पूर्व दिशा (East Direction):- 

यदि घर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा में होगा तो सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा बिना किसी रूकावट के सीधे घर में प्रवेश करती है जिससे घर में रहने वाले लोग हमेशा ऊर्जावान महसूस करते हैं !

2 . उत्तर  दिशा (North Direction):- 

उत्तर दिशा में घर का मुख्य द्वार वास्तु के अनुसार अच्छे Results देता है!

इस दिशा में बने घर में रहने वाले लोग अपने जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति केर पाते हैं!

जैसा की वास्तु में बताया गया है घर का उत्तर भाग खाली होना चाहिये तथा उसकी ऊंचाई दक्षिण दिशा से कम होनी चाहिए !

3 . दक्षिण  दिशा (South  Direction):-

वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार दक्षिण दिशा में मुख्य द्वार बनाते समय कई बातों का ध्यान रखना जरुरी होता है !

South Direction में मुख्य द्वार बना सकते है यदि अपने घर में बाकि वास्तु नियमों का पालन किया हो!

इसी वजह से मुख्यद्वार दक्षिण दिशा में बनाना वास्तु नियमो के विरुद्ध होता है जोकि कई वास्तु दोषों का कारण बनता हैं !

4 . पश्चिम  दिशा (West Direction):- 

पश्चिम दिशा से घर में नेगेटिव ऊर्जा (Negative Energy in Vastu) का आगमन है इस लिए पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार नहीं बनाना चाहिये!

5 . उत्तर -पूर्व दिशा (North -East Direction):-

वास्तुशास्त्र में उत्तर -पूर्व दिशा को ईशान कोण (Ishan-Angle) कहा जाता हैं इस दिशा में मुख्य द्वार का होना अति उत्तम फल देता हैं !

ईशान कोण में घर में किये जाने वाले कई महत्वपूर्ण कार्य किये जाते है जैसे पूजा करना , जल सम्बंधित चीजों का प्रयोग आदि !

इस दिशा में बनाये गए मुख्यद्वार की वजह से घर में धन की आवाजाही बनी रहती है और धन सम्बंधित समस्याओ का सामना नहीं करना पड़ता !

6 . दक्षिण -पूर्व दिशा (South  -East Direction):-


इस दिशा में ऐसे कार्य किये जाते है जो आग या अग्नि से सम्बंधित होते हैं जैसे - रसोई घर में गैस की स्तिथी , बिजली मीटर इत्यादि ! 

इस दिशा में मुख्य द्वार बनाना अशुभ होता हैं ! जिन घरों में घर का मुख्य द्वार  दक्षिण-पूर्व दिशा में होता है, उस घर में रहने वाली महिलाये कई प्रकार की बीमारियों से ग्रसित होती है !

7 . दक्षिण -पश्चिम  दिशा (South -West Direction):-

मुख्यद्वार का दक्षिण- पश्चिम दिशा में होना वास्तु के नियमो के अनुसार कष्टदायक होता है ऐसे घर में जहाँ  मुख्यद्वार की स्तिथि दक्षिण- पश्चिम दिशा  में होती है वहाँ धन की समस्या सदा बनी रहती है!

8  . उत्तर  -पश्चिम  दिशा (North -West Direction):-

इस दिशा में मुख्यद्वार बनाने से विभिन्न प्रकार के दोष उत्त्पन्न होते है जैसे- मानसिक तनाव , अकारण शत्रुता और कोर्ट केस इत्यादि !

 

मुख्यद्वार का आकार ( Size of Main Door):


जब भी हम मुख्यद्वार की स्तिथि व उसके दिशा निर्धारण के सम्बन्ध में बात करते है तो जो सबसे जरुरी होता है वह है मुख्यद्वार का आकार !

जिसके सम्बन्ध में  वास्तुशास्त्र में जो नियम दिए गए है उनके अनुसार मुख्यद्वार का आकार घर में बने बाकी दरवाजो से बड़ा होना चाहिए!

 जिससे की घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हमेशा बना रहे , इसलिए ये आवश्यक है की मुख्यद्वार पर किसी भी प्रकार की बाधा (Obstacle ) नहीं होनी चाहिये !

मुख्यद्वार को विभिन्न प्रकार की वस्तुओं से सजाना चाहिए , यह पर सजावटी लाइटों को लगाना चाहिए जिससे की मुख्यद्वार देखने में ऊर्जावान लगे !

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मुख्यद्वार का रंग  (Main Door Colour ):


जिस प्रकार मुख्यद्वार की स्तिथि व दिशा निर्धारण करना आवश्यक होता है उसी प्रकार मुख्यद्वार किस रंग का होना चाहिए वह भी बहुत आवश्यक होता है!


1. उत्तर दिशा - Grey , White और Brown !
2. पूर्व दिशा - Red Family व Green !
3.  पश्चिम दिशा - White और Grey !
4.  दक्षिण दिशा - काला व नीला रंग !

Main Door Vastu Remedies :

 यहाँ हम कुछ ऐसे Remedies के बारे में बात करेंगे जिनका उपयोग आप अपने Main Door के वास्तु दोषो को ठीक करने के लिए कर सकते है!

  1. आप अपने मुख्य द्वार पर एक स्वस्तिक जरूर लगाए!
  2. Main Door पर Evil Eye लगाना आपके घर में Negative Energy नहीं आने देता!
  3. घर के मुख्य द्वार पर अच्छी Light जरूर लगायें !
  4. East Facing में Sun Shape लगाए!
  5. South में पञ्च मुखी हनुमान जी लगाए!

उपरोक्त Article में मुख्यद्वार सम्बंधित प्रमुख नियम व ध्यान देने सम्बंधित कई बाते बतायी गयी है जिनका उपयोग कर हम घर बनाते समय या घर खरीदते समय यह निर्धारित केर सकते है की मुख्यद्वार कहाँ  बनाना चाहिये (Where to Place Main Door) ? 

 इस लेख में दी गयी जानकारी वास्तु सलाहकार रोबिन गोस्वमी द्वारा लिखी गयी है! यदि ये आपको अच्छी लगी तो आप इसे अपने रिश्तेदारों के साथ अवश्य Share करें!






1 comment:

  1. It is true that working with Vaastu in mind provides positive energy. If the house is built according to Vaastu, then there is peace in the house. Definitely I will contact you .

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