Vastu Tips for South Facing House in Hindi | South Facing House Vastu

वास्तुशास्त्र एक ऐसी कला है जिसकी सहायता से हम अपने रहने के स्थान को अपने लिए लाभकारी बना सकते है , प्राचीन समय से ही वास्तु हमारे जीवन का अभिन्न अंग रहा हैं। 

वास्तु द्वारा बताये नियम हमारे निवास स्थान House Vastu को सभी प्रकार की सकारात्मक ऊर्जाओं से भर देते है , जोकि हमारे जीवन में होने वाले कार्यो के लिए सीधे जिम्मेदार होती हैं। 

Vastu for South Facing House in Hindi

किसी भी मनुष्य के जीवन में घर का बहुत अधिक प्रभाव रहता है , क्या आप जानते है किसी भी मनुष्य का जैसे घर में जन्म हुआ होता है उसका भाग्य भी वैसा हो जाता हैं। 

इसलिए एक वास्तु अनुसार घर में रहना हमारे जीवन के लिए बहुत जरुरी है और ऐसा करने के लिए हमे Vastu for House के बारे में विस्तार से जानना भी। 

आज हम इस लेख में South facing House Vastu के बारे में जानेंगे। 

Table of Content:
1. South Facing.
2. Vastu for South Facing House.

2.1 Main Door Vastu.
2.2 Brahamsthan, Center of House.
2.3 Living Room.
2.4 Stairs.
2.5 Kitchen.
2.6 Toilet.
2.7 Master Bedroom.
2.8 Children Room or Study Room.
2.9 Store Room.
2.10 Water Tank.

3. Vastu Tips for South Facing House.
4. निष्कर्ष।
 


South Facing:


साउथ फेसिंग से हमारा तत्प्रेत्य किसी भी घर का मुख किस दिशा में है। यानि जब हम घर के अंदर खड़े होकर Vastu Compass में जो दिशा देखते है वह उस घर की फेसिंग कहलाती हैं। 

यदि आपको घर के अंदर खड़े होकर वास्तु कंपास में साउथ दिशा दिखे तो ऐसे घर को साउथ फेसिंग कहाँ जाता हैं। 

हमारे समाज में साउथ फेसिंग को लेकर बहुत से मिथक है जैसे की साउथ फेसिंग अच्छा नहीं होता है इत्यादि। 

Vastu for South Facing House:


हम सभी जिस घर में निवास करते है वास्तुशास्त्र के अनुसार उसकी एक फेसिंग होती है , इस प्रकार घर की साउथ फेसिंग भी होती हैं। 

वास्तु अनुसार ईस्ट व  नार्थ दिशा के अतिरिक्त साउथ फेसिंग घर बहुत ही शुभ माने जाते है परन्तु इसके लिए घर के अंदर बनी हुई चीजों का वास्तु के नियमों के अनुसार बना होना अति आवश्यक होता हैं। 

आगे हम उन्ही के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। 

1. Main Door Vastu:

Main door यानि मुख्यद्वार किसी भी घर के वास्तु के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है , ऐसा कहा जाता है की यदि किसी घर का मुख्यद्वार वास्तु अनुसार होता है तो उस घर का 70 % वास्तु सही हो जाता हैं। 

साउथ फेसिंग घर में मुख्यद्वार वेस्ट की तरफ लगाना चाहिए , क्योकि साउथ व वेस्ट दिशा एक दूसरे को स्थिर करती हैं। 

यदि साउथ फेसिंग घर में Main Door ईस्ट की तरफ लगा हो तो वहघर के लिए अच्छा नहीं होता। 

और ऐसे घर में रहने वाले लोगो के बीच झगड़े होते रहते है। 

2. Brahamasthan, Center of House:

किसी भी घर का ब्रह्मस्थान घर के संतुलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है , जैसा की बताया गया है ब्रह्मस्थान में वास्तु पुरुष जी का पेट होता है और यह सीधे घर के मुखियों को प्रभावित करता हैं। 

इसलिए जरुरी है की साउथ फेसिंग घर में ब्रह्मस्थान खुला हो तथा वहां किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं होना चाहिए। 

घर के ब्रह्मस्थान में मंदिर या घर का पूजा रूम बनाना चाहिए , ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और घर के मुखिया को यदि किसी भी प्रकार की बीमारी हो तो ब्रह्मस्थान उपाय से वह भी समाप्त हो जाती हैं। 

3. Living Room:

साउथ फेसिंग घर का लिविंग रूम साउथ ईस्ट दिशा में बनाना चाहिए , लिविंग रूम बनाते समय लिविंग रूम वास्तु द्वारा बताये नियमों का सही प्रकार से पालन करना चाहिए। 

यदि साउथ फेसिंग घर का लिविंग रूम साउथ ईस्ट दिशा में बनाया गया है तो वहां लाल , पीले तथा बैगनी रंग का इस्तेमाल करना चाहिए। 

लिविंग रूम के ईशान कोण में फाउंटेन या फिश एक्वेरियम जरूर लगाना चाहिए ऐसा करने से लिविंग रूम की ऊर्जा संतुलित रहती है और वहां बैठने पर सभी को अच्छा प्रतीत होता हैं। 

लिविंग रूम बनाते समय विशेष ध्यान रखें की लिविंग रूम का आकार आयताकार होना चाहिए। 

4. Stairs:

घर का भार सीढ़ियों के ऊपर होता है ऐसा माना जाता है , इसलिए सीढ़ियों का सही दिशा में बनाना अति आवश्यक होता हैं। 

यदि हम साउथ फेसिंग घर में सीढ़ियों की बात करें तो सीढ़िया साउथ ईस्ट दिशा में बनानी चाहिए , ऐसा करने से घर में Fire Zone सम्बंधित असंतुलन नहीं होता है जिससे की घर की महिलाओं को बीमारियाँ नहीं लगती। 

सीढ़ियों को वास्तु अनुसार बनाना चाहिए ये इस प्रकार से बनी हो की इनकी संख्या सम होनी चाहिए। 

5. Kitchen:

जब भी हम साउथ फेसिंग घर में किचन बनाने के लिए सोचते है तो इसके लिए साउथ ईस्ट तथा नार्थ वेस्ट दोनों ही दिशा बहुत अच्छी मानी जाती हैं , इसलिए ध्यान रखें की किचन बनाते समय सभी वास्तु नियम ध्यान पूर्वक अपनाये जाएँ। 

किचन का आकार तथा किचन में रखें जाने वाले अन्य समानो का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

6. Toilet:

घर में नार्थवेस्ट दिशा में टॉयलेट का निर्माण करना साउथ फेसिंग घर के लिए अच्छा होता है जैसा की आप जानते है यदि घर में टॉयलेट की दिशा व उसकी स्तिथि यदि वास्तु अनुसार नहीं होती तो वह घर के माहौल तथा पैसो के लिए सीधे जिम्मेदार होता हैं। 

अतः टॉयलेट की सही दिशा व पोजीशन का साउथ फेसिंग घरो में विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

यदि आप चाहे तो टॉयलेट के अंदर एक हरे रंग का बल्ब जरूर लगाए ऐसा करने से टॉयलेट से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होना कम हो जाता हैं। 

7. Master Bedroom:

घर के मुखियाँ के कमरे को Master Bedroom कहा जाता है किसी भी घर को चलाने वाला घर का मुखिया होता है , इसलिए जरुरी है की मास्टर बैडरूम वास्तु अनुसार सही दिशा में बना होना चाहिए। 

साउथ फेसिंग घर में मास्टर बैडरूम साउथ वेस्ट दिशा में बनाना चाहिए , तथा मास्टर बैडरूम वास्तु के बाकि नियम जैसे रंग , बेड की दिशा तथा बैडरूम में चीजों की स्तिथि सही प्रकार रखनी चाहिए। 

मास्टर बैडरूम के साथ हो सके तो अटैच्ड बालकनी नहीं बनानी चाहिए , क्युकी साउथ वेस्ट दिशा में बालकनी बनाना वास्तु अनुसार अच्छा नहीं होता। 

8. Children's Room or Study Room:

साउथ फेसिंग घर में बच्चो का कमरा बनाते समय ध्यान रखें की यह नार्थ ईस्ट या ईशान कोण में बनाया जायें , ईशान कोण में पढ़ाई करने से बच्चो को पढ़ाई में सफलता प्राप्त होती हैं। 

परन्तु स्टडी रूम वास्तु में बताये नियमो के अनुसार ही बाकि चीजों की स्तिथि सुनिश्चित करें। 

बच्चो के कमरे में बेड की दिशा इस प्रकार होनी चाहिए की जब वह सोये तो उनका सर ईस्ट दिशा में होना चाहिए। 

तथा पढ़ाई करते समय ईस्ट या नार्थ दिशा की ओर मुख करना सबसे बेहतर होता हैं। 

9. Store Room:

वास्तु के अनुसार स्टोर रूम साउथ फेसिंग घर की स्तिथरता को बढ़ाने का काम करता हैं। 

इसके लिए जरुरी है की घर के साउथ या वेस्ट में स्टोर रूम का निर्माण किया जाये तथा इसमें हमेशा समान भरा होना चाहिए। 

यदि साउथ फेसिंग घर में स्टोर रूम बना होता है तो घर में अचानक से कोई अनहोनी कभी नहीं होती हैं। 

10. Water Tank:

किसी भी घर में पानी का स्थान उस घर में धन सम्बन्धी वास्तु के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता हैं , अतः हमे वाटर टैंक को नार्थ ईस्ट दिशा में बनाना चाहिए। 

Overhead Water tank यदि नार्थ वेस्ट दिशा में बनाये तो ज्यादा लाभकारी होता हैं। 

साउथ फेसिंग घर का वास्तु करते समय उपरोक्त चीजों को वास्तु अनुसार बनाना चाहिए , यदि उपरोक्त जगहों का निर्माण वास्तु नियमों के अनुसार किया जाता है , तभी साउथ फेसिंग घर शुभ हो पाते हैं। 


Vastu Tips for South Facing House:

साउथ फेसिंग घर के निर्माण में कई चीजों का ध्यान रखना जरुरी होता है परन्तु कुछ चीजे ऐसी होती है। 

जोकि घर की ऊर्जा को अधिक बढ़ा देती है जिससे की हमे घर के हर एक हिस्से का सही प्रकार प्रभाव प्राप्त होता हैं। 

  1. साउथ फेसिंग में घर का फ्रंट हमेशा ऊँचा होना चाहिए , क्योकि वास्तुशास्त्र के अनुसार साउथ दिशा की ऊंचाई नार्थ के मुकाबले ज्यादा होनी चाहिए। 
  2. घर के मुख्यद्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की प्रतिमा लगानी चाहिए , ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता हैं। 
  3. बालकनी बनाते समय विशेष ध्यान रखें की वह घर के फ्रंट में न हो , क्योकि वास्तु में साउथ दिशा की बालकनी बनाना मना होता हैं। 
  4. फर्श की ऊंचाई का साउथ फेसिंग घरो में विशेष ध्यान रखना चाहिए की घर का स्लोप साउथ तो नार्थ हो जिसमे साउथ की ऊंचाई ज्यादा रखनी चाहिए। 
  5. छत के ऊपर एक पोल साउथ दिशा में जरूर लगाना चाहिए, ऐसा करने से घर के बड़े बेटे या बेटी के जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती। 
  6. यदि घर साउथ फेसिंग हो तो घर के बाहर का रंग ग्रे , पीला या गोल्डन कराएं ऐसा करने से घर का आकर्षण और बढ़ जाता हैं। 
  7. Mirror लगाते समय ध्यान रखें की यह घर की साउथ दीवार पर न लगा हो। 


निष्कर्ष:


वास्तु के अनुसार घर का निर्माण करना तथा उसमे अपनी सभी जरूरतों को भी पूरा करने के लिए कई चीजों का ध्यान रखना अति आवश्यक होता हैं। 

हमने उपरोक्त लेख में Vastu for South Facing House in Hindi  तथा Vastu Tips for South Facing House के विषय में विस्तार से चर्चा की। 

साउथ फेसिंग हाउस वास्तु को अपने लिए अधिक प्रभावी बनाने के लिए हमे Vastu for Home के सभी नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। 

इसमें Evavaastu अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है यहां आप वास्तुशास्त्र के बारे में विस्तार से समझ सकते हैं। 


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