Vastu Toilet Direction [2020]

 Vastu Toilet Direction में हम Vastu directions  तथा Toilet direction as per Vastu के बारे में जानेंगे। 

वास्तुशास्त्र एक विज्ञानं है जो हमे अपने घर में चीजों की सही दिशा तथा उनसे हमारे जीवन में होने वाले प्रभावों के बारे में समझाता हैं। वास्तु में चीजों की स्तिथि तथा उनके परिणाम वास्तु दिशाओं , वास्तु पुरुष तथा पञ्च तत्वों पर निर्भर करती हैं। 

आज के इस लेख में हम वास्तु टॉयलेट दिशा के बारे में वास्तुशास्त्र के नियमों को समझेंगे जिनकी सहायता से हम अपने घर में टॉयलेट दोष से बच पायेंगे। 

Vastu Directions:

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वास्तुशास्त्र में कुछ दिशाएं बतायी गयी है , जिनके अनुसार किसी भी जगह का वास्तु चेक किया जाता हैं , वास्तु  4 मुख्य दिशाएं बतायी गयी है - ईस्ट , वेस्ट, नार्थ व साउथ। 

इन्हीं चार मूल दिशाओं से हमें किसी भी जगह के बारे में ज्ञात होता है की वहा का वास्तु कैसा है तथा वहां किसी प्रकार का वास्तु दोष तो नहीं हैं। इन्हीं चार मूल दिशाओं को Vastu Directions कहा जाता हैं। 

इन चार मूल दिशाओं के अतिरिक्त चार और सब -मूल दिशाएं होती है , जिन्हें नार्थईस्ट, नार्थवेस्ट, साउथ ईस्ट तथा साउथ वेस्ट दिशाओं के नाम से जाना जाता हैं। 

Vastu Toilet Direction:

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वास्तु के अनुसार टॉयलेट बनाने के लिए सही दिशा को Vastu toilet direction कहा जाता है , इसके लिए नार्थ-वेस्ट तथा साउथ-ईस्ट दिशा सबसे उपयुक्त बतायी गयी हैं। 

हमे टॉयलेट का निर्माण करते समय ध्यान रखना  यह ब्रह्मस्थान में न बनाया जाए , क्योकि घर का मध्य किसी भी घर की ऊर्जा के लिए बहुत ही आवश्यक होता हैं। 

Toilet Vastu के अंतर्गत कई चीजें होती है जैसे टॉयलेट सीट की दिशा , washbasin की दिशा व फेसिंग तथा टॉयलेट के अंदर की चीजें इत्यादि। 

टॉयलेट का निर्माण करते समय वास्तु के नियमो का विशेष ध्यान रखना चाहिए , क्योकि किसी भी प्रकार का टॉयलेट दोष घर में पैसों की समस्या तथा बीमारी  कारण होता हैं। 

टॉयलेट सीट डायरेक्शन व फेसिंग:

किसी भी टॉयलेट का निर्माण करने में वास्तु के अनुसार टॉयलेट सीट की दिशा का फेसिंग का विशेष ध्यान रखना चाहिए , और ध्यान रखें की टॉयलेट सीट का इस्तेमाल करते समय नार्थ या ईस्ट दिशा की ओर मुख नहीं होना चाहिए। 

यदि टॉयलेट सीट इस प्रकार से लगी हो जोकि टॉयलेट  दरवाजे के सामने है तो यह टॉयलेट में वास्तु दोष होता हैं। 
इसके लिए टॉयलेट सीट की दिशा को परिवर्तित कर देना चाहिए। 

वाशबेसिन डायरेक्शन:

वास्तुशास्त्र में पानी का इस्तेमाल होने वाली चीजों के लिए ईशान कोण यानि नार्थ -ईस्ट दिशा सबसे उपयुक्त बताई गयी है , इसलिए ध्यान रखें की टॉयलेट में वाशबेसिन ईशान कोण में लगाया गया हो। 

जैसा की आप जानते ही है वाशबेसिन में हमेशा पानी का इस्तेमाल किया जाता है , तथा ये टॉयलेट के दरवाजे सामने भी लगाया जा सकता हैं। 

टॉयलेट वाटर की निकासी:

टॉयलेट के निर्माण के समय ध्यान रखें की टॉयलेट का वैस्ट साउथ या नार्थ दिशा से ना निकले , ऐसा होने पर घर के सदस्यों पर कर्जा बढ़ता हैं। 

टॉयलेट वाटर की निकासी के लिए वेस्ट दिशा सबसे अच्छी रहती हैं। 

निष्कर्ष:

उपरोक्त लेख में हमने वास्तु टॉयलेट डायरेक्शन के बारे में विस्तार से जाना , तथा इसके अतिरिक्त वास्तु डायरेक्शन तथा उनके अनुसार चीजों की स्तिथि के बारे में भी समझा। 

हम आशा करते है की आपको इस लेख  गयी जानकारी अच्छी लगी होगी इसे शेयर जरूर करें , यदि आपका कोई प्रश्न हो तो हमे कमेंट करें। 

आपके समय के लिए धन्यवाद। 

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