Vastu Purusha in Hindi [Vastu Purusha Mandala]

 Vastu Purusha या Vastu Purusha Mandala वास्तुशास्त्र का प्रमुख स्तंभ है क्योकि किसी भी जगह का वास्तु वास्तुपुरुष की स्तिथि पर निर्भर करता हैं। 

आज के इस लेख में हम Vastu Purusha या Vastu Purusha Mandala, Vastu Purusha Mandala Story , Vastu Purusha position तथा Vastu Purusha in Home के बारे में विस्तार से समझेंगे। 

Vastu-Purush-in-Hindi


आप सभी ने कभी न कभी वास्तु के बारे में सुना होगा , वास्तुशास्त्र हमे अपने घर में चीजों को रखने की सही जगह तथा उनसे सम्बंधित नियमों के बारे में बताता हैं। परन्तु क्या आपने कभी सोचा है की इन नियमों का आधार क्या है ?
या इन नियमों के लिए बेसिक रूल क्या बताये गए हैं। जैसा की हमने शुरुवात में ही बताया की वास्तु पुरुष वास्तुशास्त्र का एक मुख्य स्तंभ हैं। आईये इसको समझने के लिए वास्तु पुरुष के बारे में समझते हैं। 

Vastu Purusha:

वास्तुशास्त्र हमें किसी भी जगह के सम्बन्ध में उसकी ऊर्जा इत्यादि के बारे में समझाता हैं , किसी भी जगह का वास्तु वास्तुपुरुष से सम्बंधित होता हैं। क्योकि वास्तुपुरुष ही समस्त दिशाओं व देवताओं पर अपना प्रभाव डालते हैं। उनका प्रभाव किसी भी जगह चाहें वह घर हो या कोई और जगह , सभी जगह पड़ता हैं। पुराने समय से ही वास्तुपुरुष के बारे में हमारे पुराणों में बताया गया हैं। 

पृथ्वी पर स्तिथ हर एक वस्तु में ऊर्जा होती है वह नकारात्मक या सकारात्मक कुछ भी हो सकती हैं , परन्तु यह किस चीज पर निर्भर करती है तथा इसके नियम क्या है उसके बारे में जानने के लिए वास्तुपुरुष के सम्बन्ध में विस्तार से जानना जरुरी है इसलिए सबसे पहले हम वास्तुपुरुष की कहानी के बारे में जानते हैं। 

वास्तुपुरुष की कहानी (Story of Vastu Purusha):


ऐसा कहा जाता है की पुराने समय में अंधकासुर (जोकि शिव जी का पुत्र था ) और भगवान शिव के बीच युद्ध छिड़ गया। युद्ध के दौरान भगवान शिव के शरीर से पसीने की बूंद गिरी जिससे एक राक्षस पैदा हुआ उसका नाम था - वास्तुपुरुष। 

युद्ध के दौरान इस राक्षस ने भगवान शिव से वरदान माँगा की वह भूखा है तो क्या वह अपनी भूख मिटा सकता है ? भगवान शिव न उसे हा बोल दिया। इसके बाद वह राक्षस पृथ्वी पर स्तिथ सभी चीजों को खाने लगा।  ऐसा करते देख सभी भगवान सृस्टि के रचयता भगवान ब्रह्मा के पास पहुंचे। और उनसे चिंतित होकर बोले की इस प्रकार यह राक्षस सभी चीजों को खा जायेगा कृपा कुछ करें। 

तब भगवान बह्मा ने सभी 44 देवताओं को बोला की तुम सभी इस राक्षस को इस प्रकार से दबा दो की इसका मुख ईशान कोण में हो। ऐसा सुन सभी देवताओं ने यही किया। ऐसा करने पर वास्तुपुरुष ने भगवान ब्रह्मा से पूछा की में भूखा हूँ आप सबने मेरे साथ ऐसा क्यों किया तो भगवान ब्रह्मा ने कहा की पृथ्वी लोक पर जोभी मनुष्य कोई भी निर्माण करेगा उसको आपकी पूजा करनी अनिवार्य होगी और आपके नियमों के अनुसार निर्माण करना होगा। 

तभी से वास्तुपुरुष हर एक जगह में वास करते है और जोभी जगह उनके नियमों के विपरीत बनी हो उसपर अपना नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। 

वास्तुपुरुष मंडला और 45 देवता  (Vastu Purusha Mandala & 45 Devtas):

Vastu-Purush-Mandala-in-Hindi


जैसा की हमने आपको पहले बताया की किसी भी जगह के वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण होता है वास्तुपुरुष मंडला व 45 देवता की स्तिथि। किसी भी जगह में इन देवताओं का स्थान वास्तुपुरुष की स्तिथि के अनुसार होता है। इसलिए वास्तुपुरुष मंडला के सम्बन्ध में जानना बहुत ही आवश्यक हैं। 

आपने उपरोक्त कहानी में पढ़ा की किस प्रकार वास्तुपुरुष को वश में करने के लिए ब्रह्मा जी ने सभी 44 देवताओं को आदेश दिया की इन्हे इस प्रकार दबाए की इनका मुख ईशान कोण में हो। 

44 देवताओं के द्वारा जिस प्रकार वास्तुपुरुष किसी भी स्थान में वास करते है उसको ही वास्तु पुरुष मंडला कहा जाता हैं। 

वास्तुपुरुष मंडला हमे किसी भी जगह के वास्तु को समझने तथा उसका उपाय करने में बहुत ही सहायक होता है इसलिए हमेशा Vastu Purush ki Position  का ध्यान रखें। 


Vastu Purush in Home:

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किसी भी घर के वास्तु में वास्तुपुरुष का बहुत अधिक महत्व होता है क्योकि उस घर में बनी चीजें वास्तु के अनुसार होने पर वहा की ऊर्जा सकारात्मक रहती है वरना नहीं। 

आईये घर की विभिन्न जगहों पर वास्तुपुरुष का क्या प्रभाव पड़ता है उसके बारे में जानते हैं। 

1. मुख्यद्वार पर वास्तुपुरुष का प्रभाव:

घर का मुख्यद्वार हमेशा इस प्रकार से बनाना चाहिए की वह ईस्ट या नार्थ मुखी हो , ऐसा होने का मुख्य कारण है वास्तुपुरुष की किसी भी घर में स्तिथि , जिनके अनुसार वास्तुपुरुष घर के नार्थ -ईस्ट दिशा में अपने मुख की ओर से विराजमान होते है। इसलिए घर का मुख्यद्वार हमेशा नार्थ या ईस्ट मुखी होना चाहिए। 

किसी भी घर का मुख्यद्वार बहुत ही जरुरी अंग माना जाता है क्योकि यहाँ से ही घर में सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती हैं। इसलिए जरुरी हो जाता है की घर का मुख्यद्वार वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुसार बनाया जाए। 

मुख्यद्वार की फेसिंग, मुख्यद्वार का आकार , मुख्यद्वार की दिशा व स्तिथि तथा मुख्यद्वार का रंग वास्तु के अनुसार होना बहुत ही आवश्यक होता है क्योकि ऐसा नहीं होने पर घर में वास्तुदोष उतपन्न होते है जोकि कई प्रकार से घर के सदस्यों को हानि पहुँचते हैं। 

2. ड्राइंग रूम पर वास्तुपुरुष का प्रभाव:

घर में ड्राइंग रूम बनाते समय ध्यान रखें की यह घर के नार्थ -ईस्ट या नार्थ -वेस्ट दिशा में बना हो , ऐसा होने से घर में रहने वाले सभी लोगो के आपसी रिश्ते बहुत मजबूत रहते हैं। 

इसका मुख्य कारण वास्तुपुरुष की स्तिथि के कारण होता है क्योकि नार्थ -ईस्ट दिशा में किया गया कार्य आपसी रिश्ते मजबूत बनाता हैं। 

जैसा की आप जानते है किसी भी घर का ड्राइंग रूम घर में वह स्थान होता है जहाँ घर के सदस्य आपस में बैठकर समय व्यतीत करते है जिससे उनके रिश्ते और भी मजबूत होते है , साथ ही किसी भी अजनबी के घर में प्रवेश करते ही पहला स्थान ड्राइंग रूम ही होता है जहा वह बैठता है। इसलिए ड्राइंग रूम वास्तु का विशेष ध्यान रखें। 

3. किचन वास्तु पर वास्तुपुरुष का प्रभाव:

पुराने समय से ही घरों में रसोईघर का बहुत महत्व होता है क्योकि यहा घर में निवास करने वाले लोगो के लिए खाना बनाया जाता हैं। और यही कारण है की किचन वास्तु किसी भी घर के वास्तु का आधार होता हैं। 

वास्तुशास्त्र के अनुसार किचन घर के साउथ -ईस्ट दिशा या अग्नि कोण में बनाना चाहिए , इसका वास्तुपुरुष के अनुसार भी प्रभाव होता है क्योकि घर में वास्तुपुरुष की स्तिथि इस प्रकार होती है की अग्नि सम्बन्धी कार्य हमे साउथ -ईस्ट दिशा में करने होते हैं। 

यदि किचन घर के अग्नि कोण में बनाया गया हो तो वहा निवास करने वाली महिलओं का स्वास्थ्य अच्छा रहता है जिससे घर की ऊर्जा स्थिर रहती हैं। 

4. मास्टर बैडरूम पर वास्तुपुरुष का प्रभाव:

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर का मास्टर बैडरूम साउथ -वेस्ट दिशा में होना चाहिए इसके लिए जरुरी है की आप घर का साउथ -वेस्ट जोन हैवी रखें। कभी भी घर में मास्टर बैडरूम को नार्थ -ईस्ट दिशा में नहीं होना चाहिए। 

वास्तुपुरुष की स्तिथि के अनुसार मास्टर बैडरूम साउथ वेस्ट में बनाने से घर के मुखियाँ का प्रभुत्व घर में बना रहता हैं। यह घर का विशेष स्थान होता है क्योकि यहाँ से पुरे घर का निर्धारण किया जाता हैं। 

निष्कर्ष:

उपरोक्त लेख में हमने Vastu Purusha, Vastu Purusha Position, Vastu Purusha Mandala , वास्तुपुरुष की कहानी तथा Vastu Purusha in Home के बारे में विस्तार से जाना। 

जिससे हमे पता चलता है की वास्तु पुरुष का घर में बहुत ही महत्व होता है जिससे घर की ऊर्जा संचालित होती है जोकि किसी भी जगह के लिए बहुत आवश्यक हैं। 

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